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भारत के इस गांव में कभी नहीं हुई एक भी FIR, यहां भाई-चारे की दी जाती है मिसाल

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भारत के इस गांव में कभी नहीं हुई एक भी FIR, यहां भाई-चारे की दी जाती है मिसाल

Indian Village: आज के दौर में लोग अपने-अपने परिवारों में भी एक-दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं. यह देखकर बहुत दुख होता है कि कैसे छोटे-छोटे विवाद भी हिंसा का रूप ले लेते हैं. कई बार तो आपसी झड़प में लोग अपनों की भी जान ले लेते हैं. ज्यादातर पुलिस स्टेशनों और अदालतों में लड़ाई, खून खराबा, चोरी और धोखे से जुड़े मामलों की बाढ़ आ गई है. हालांकि, इस अशांत स्थिति के बीच हरियाणा के फतेहाबाद में बधाई खेड़ा गांव ने एक मिसाल कायम की है. यहां पर लोगों के बीच इतना-अच्छा मेल-जोल है कि आप सोच भी नहीं सकते. 

इस गांव में किसी के खिलाफ नहीं है एक भी एफआईआर
हैरानी की बात यह है कि गांव में किसी के खिलाफ एक भी पुलिस मामला दर्ज नहीं किया गया है. अधिकारियों को शामिल करने के लिए कोई विवाद भी पुलिस तक नहीं पहुंचा है. ग्रामीणों ने आपसी भाईचारे से विवाद सुलझाने की परंपरा स्थापित की है. जब भी कोई असहमति या विवाद उत्पन्न होता है, तो गांव के बड़े-बुजुर्ग एक साथ मिलकर शांति से बात करते हैं और आपस में इस मुद्दे को सुलझाते हैं. इस गांव में हर सदस्य बड़ों के फैसले को बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करता है. किसी भी पुलिस शिकायत के न होने और गांव के युवाओं व बुजुर्गों के नशा सेवन से परहेज करने के पीछे भी यह वजह है. 

आखिर कैसे रहते हैं यहां के लोग?
यह गांव 522 व्यक्तियों का घर है, जिसमें 370 पात्र मतदाता हैं. शुरुआत में हरियाणा के डागर गांव का एक किसान परिवार बधाई खेड़ा में बस गया. उनके नक्शेकदम पर चलते हुए, कई लोग गांव में रहने लगे. गांव से सटे, 18 छोटी और बड़ी बस्तियां हैं जिन्हें ढाणी के नाम से जाना जाता है. बधाई खेड़ा गांव में मुख्य रूप से दो जाट समाज के गोत्र हैं, जिनका नाम बराला और बुडानिया है. गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के लिए गांव पैतृक महत्व रखता है. एक सामुदायिक केंद्र का हाल ही में निर्माण किया गया था. इसके अलावा, "जगमग योजना" के तहत पूरे गांव को हाल ही में रात के समय रोशन किया गया था.

पंचायत चुनाव के दौरान भी कोई टकराव नहीं होता. जब गांव में सरपंच चुनने की बात आती है, तो गांव के लोग शांतिपूर्वक एक-दूसरे का समर्थन करते हैं, चाहे वह उत्सव के क्षण हों या दुःख के समय. युवा पीढ़ी बड़ों के प्रति गहरा सम्मान रखती है, समुदाय के भीतर शांति को बढ़ावा देने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को पहचानती है.