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कांग्रेस विधायकों के अजब बोल; साफिया जुबेर बोलीं- हम कृष्ण वंशज, अमीन खान ने कहा- भारत सेक्युलर नहीं-VIDEO

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कांग्रेस विधायकों के अजब बोल; साफिया जुबेर बोलीं- हम कृष्ण वंशज, अमीन खान ने कहा- भारत सेक्युलर नहीं-VIDEO

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को अशोक गहलोत सरकार ( Ashok Gehlot Govt)के दो विधायकों के अजब गजब बयान सामने आए। विधानसभा (Rajasthan Legislative Assembly) में शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही थी। इसी चर्चा में कांग्रेस विधायक साफिया जुबेर ने खुद को और मेव समाज को भगवान राम कृष्ण का वंशज बता दिया। वहीं कांग्रेस विधायक अमीन खान (Congress MLA Amin Khan) ने सूबे के स्कूलों में कराई जाने वाली प्रार्थना पर सवाल उठाते हुए एक विवादित बयान दे दिया। अमीन खान ने कहा कि 31 अक्टूबर 1984 के बाद से वह भारत को सेक्यूलर देश नहीं मानते हैं। 

अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Govt) की विधायक साफिया जुबेर ने शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर सदन में चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा- मेव समाज के लोग अलवर, नूंह और थोड़ा भरतपुर में बसते हैं, जहां कृष्ण जी का जन्म हुआ था। मैंने भी जागाओ से अपना इतिहास निकलवाया है। अतीत के बारे में जानकारी जुटाई है। इसमें निकल कर सामने आया कि मेव लोग तो राम और कृष्ण जी के वंशज हैं।

राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक साफिया जुबेर (Congress MLA Shafia Zubair) ने आगे कहा कि भले ही धर्म परिवर्तन हो गया हो लेकिन आदमी का खून तो नहीं बदलता है। हममें खून तो राम और कृष्ण का ही है। मेव समाज को बार-बार पिछड़ा कहने की जरूरत नहीं है। मेव को मेवा समझें आप... 10 साल में देखना हम कहां पहुंचते हैं। अभी हम तीन विधायक यहां तक पहुंचे हैं। हम आगे भी तरक्की करेंगे। 

वहीं बाड़मेर के शिव से कांग्रेस विधायक अमीन खान (Congress MLA Amin Khan) ने स्कूलों में बुलाई जाने वाली प्रार्थना पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में 31 अक्टूबर 1984 को ही सेकुलरिज्म का खात्मा हो गया था। अब तो हम वक्त गुजारते हैं। आगे भारत हिंदू राष्ट्र भी हो जाएगा लेकिन हमें मारेगा कोई नहीं। हम हिंदू धर्म को अच्छी तरह से जानते हैं। हिंदू भी दूसरे इंसान की रक्षा करने का काम करेंगे। लेकिन राजस्थान में आज हर स्कूलों में एक संप्रदाय के नाम की पूजा से कार्यक्रम शुरू होते हैं। लोग डर की वजह से बोलते नहीं हैं लेकिन समझते सब हैं। धर्मनिरपेक्षता तो कागजों में ही है।