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कम नहीं, ज्यादा सोने से भी आ सकता है हार्ट अटैक, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट

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कम नहीं, ज्यादा सोने से भी आ सकता है हार्ट अटैक, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट
नींद ना आना एक समस्या है। जिसकी वजह से तमाम तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। वहीं नींद ना आने से हाई बीपी और हार्ट अटैक जैसे रिस्क भी हो जाते हैं। दिनभर में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि अगर आप बहुत ज्यादा सोते हैं तो ये खबर आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है। हाल ही में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जो लोग जरूरत से ज्यादा सोते हैं उनमे भी हार्ट अटैक का खतरा होता है। 


सोने के इन लक्षणों में रहता है हार्ट अटैक का खतरा
अगर आप सोते समय खर्राटे लेते हैं, रातभर करवट बदलते हैं, दिन में झपकी लेते हैं या रात को बार-बार उठते हैं तो ये खराब नींद के लक्षण होते हैं। जिनकी वजह से हार्ट अटैक का खतरा होता है। ज्यादा सोने और बदले में ज्यादा नींद की समस्या होने से हार्ट अटैक का खतरा पांच गुना होता है। आयरलैंड के गालवे यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी के ऑथर क्रिस्टीन मैककार्थी के हिसाब से जिन लोगों को नींद से जुड़ी ये पांच समस्याएं होती है उन्हें स्ट्रोक का खतरा उन लोगों की तुलना में ज्यादा होता है जिन्हें नींद की दिक्कत नहीं होती है। 

नौ घंटे से ज्यादा सोने वालों को खतरा
स्टडी में दिए स्टेटमेंट में खुलासा किया गया है कि नौ घंटे से ज्यादा सोने वाले लोगों को दोगुना हार्ट अटैक का खतरा होता है। सुनकर आश्चर्य होगा लेकिन ये सच है। जबकि इस स्टडी में हार्ट अटैक के इन खतरों को निकाल दिया गया है। जिसमे डिप्रेशन, एल्कोहल की वजह से नींद, स्मोकिंग,  फिजिकल एक्टिविटी की कमी शामिल थी। सामान्य तौर पर दिनभर में 9 घंटे की नींद लेते हैं तो हार्ट अटैक का रिस्क रहता है।


स्लीप एप्निया है तो संभल जाएं
वहीं स्लीप एप्निया के शिकार लोग जो नींद में हर घंटे सांस रुक जाने के परेशान रहते हैं, में हार्ट अटैक का खतरा तीन गुना ज्यादा होता है। स्लीप एप्निया अक्सर सांस रुक जाने का पैटर्न चेंज करता रहता है। जिसकी वजह से हार्ट अटैक का रिस्क सबसे ज्यादा होता है।
 
खर्राटे को ना लें हल्के में
जिन लोगों को ज्यादा खर्राटे आते हैं वो भी हार्ट अटैक के रिस्क पर रहते हैं। क्योंकि खर्राटे आना भी स्लीप एप्निया का ही एक रूप है। जिसे लोग हमेशा हल्के में लेते हैं और इलाज कराना जरूरी नहीं समझते। जिन लोगों को खर्राटे आते हैं वो 91 प्रतिशत ज्यादा हार्ट अटैक के खतरे पर होते हैं। ऐसे लोगों की कभी भी नींद में सांस रुक सकती है। 

ज्यादा झपकी लेना भी है रिस्की
बहुत सारे लोगों को दिन में सोने की आदत होती है या हर वक्त वो झपकी लेते रहते हैं। अगर आप अक्सर झपकी लेते रहते हैं तो ये भी रिस्की है। एक घंटे से ज्यादा की झपकी लेते हैं तो उन लोगों से ज्यादा हार्ट अटैक के खतरे के घेरे में रहते हैं जो झपकी लेना पसंद नहीं करते। झपकी लेने वालों को करीब 88 प्रतिशत ज्यादा हार्ट अटैक का खतरा रहता है।