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12 साल पहले शख्स के पैरों पर मारा था लकवा, AI की मदद से हुआ ऐसा चमत्कार; सुनकर हो जाएंगे हैरान

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12 साल पहले शख्स के पैरों पर मारा था लकवा, AI की मदद से हुआ ऐसा चमत्कार; सुनकर हो जाएंगे हैरान
Artificial Intelligence का बूम देखने को मिल रहा है. ओपनएआई के चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद से Google, Microsoft, Meta जैसी कंपनियां भी इसमें शामिल हो गई हैं. ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है. अब AI स्वास्थ्य सेवा में क्रांति लाने जा रही है. एक खबर ऐसी है, जिसको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने एआई की मदद से एक लकवाग्रस्त व्यक्ति को अपने निचले शरीर पर नियंत्रण पाने में मदद की. 


12 साल बाद फिर पैरों पर खड़ हुआ Gert-Jan Oskam
Gert-Jan Oskam को 2011 में कमर के नीचे लकवा मारा गया था. वो अब खुद से चलने लगा है. 40 वर्षीय Oskam ने सिर्फ अपने विचारों का उपयोग करके अपने अंगों पर नियंत्रण प्राप्त किया और यह दो ट्रांसप्लांट के कारण संभव हो पाया जिसने उनके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच संबंध को रिवाइव किया. फ्रांस और स्विट्ज़रलैंड के साइंटिस्ट की टीम ने ओस्कम के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच एक डिजिटल ब्रिज विकसित करने का एक नया तरीका खोजा. इस ब्रिज से वो फिर चलने में सक्षम हुआ. 

डिजिटल ब्रिज को किया गया तैयार
एक न्यूरोसाइंटिस्ट ग्रेगोइरे कोर्टाइन ने अपने टीम के साथ संचार को बहाल करने के लिए एक डिजिटल ब्रिज का उपयोग किया है, जिसका परिणामस्वरूप विचारों को कार्रवाई में बदल दिया जा सकता है. यह तकनीक मस्तिष्क के क्षेत्र में ट्रांसप्लांट का उपयोग करती है, जो सामान्य रूप से पैरों की मांसपेशियों को नियंत्रित करता है. इम्प्लांट डिवाइस व्यक्ति के विचारों को अवशोषित करता है और उन्हें इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन में पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करने के लिए प्रेरित करता है, जिसके परिणामस्वरूप लोग सामान्यतः चलने लगते हैं.

वैज्ञानिकों ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य ओस्कम के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था. उन्होंने कहा कि अभी के लिए, ओस्कम सामान्य रूप से नहीं चल सकता है. हालांकि, मानव जाति के इतिहास में यह पहली बार था कि रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद अलग होने के बाद केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के दो क्षेत्रों को दोबारा जोड़ा गया था.