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हाईकोर्ट : अयोग्य घोषित अभ्यर्थी का फिर मेडिकल का निर्देश

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हाईकोर्ट : अयोग्य घोषित अभ्यर्थी का फिर मेडिकल का निर्देश

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने जूनियर इंजीनियर पद की भर्ती में मेडिकल में अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थी का पुन स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित कर मेडिकल कराने और उसमें उपयुक्त पाए जाने पर सम्पूर्ण कार्यवाही तीन माह के भीतर समाप्त करते हुए नियुक्ति प्रदान करने और उससे संबधित सभी लाभ देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव एवं डॉ संजीव कुमार की खंडपीठ ने अनुराग चौधरी की याचिका पर उसके अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी और दूसरे पक्ष के वकील को सुनकर दिया है।


खंडपीठ ने याची की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और अपील खारिज करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने आदेश की जानकारी देते हुए बताया कि याची ने रेलवे की विज्ञापन सीईएन संख्या 03/2018 के तहत जूनियर इंजीनियर पद के लिए आवेदन किया था, जिसमें लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद याची को मेडिकल में रिजेक्ट कर दिया गया याची को आंख की बीमारी बता कर नियुक्ति देने से इनकार किया गया था। जबकि याची कट ऑफ से अधिक नंबर लाया था।

वार्ड के आधार पर प्रवेश से मना नहीं कर सकते स्कूल:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत किसी बच्चे को नगर निगम वार्ड के आधार पर दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकता है। स्कूल यह नहीं कह सकता कि बच्चा नगर निगम के जिस वार्ड में निवास कर रहा है, उसी वार्ड के स्कूल में उसे दाखिला मिलेगा दूसरे वार्ड के स्कूल में नहीं। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अरजीत प्रताप सिंह की याचिका पर उसके अधिवक्ता रजत ऐरन और सरकारी वकील को सुनकर दिया है। मुरादाबाद के वार्ड 15 निवासी अरजीत प्रताप सिंह ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत जिले के वार्ड 16 स्थित आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल की प्री नर्सरी कक्षा में अलाभित समूह के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत कोटे में आवेदन किया था। खंड शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद ने उसका आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया कि बच्चे ने अपने वार्ड से इतर वार्ड स्थित विद्यालय में आवेदन किया है। याची के अधिवक्ता रजत ऐरन का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। वर्ष 2009 के आरटीई एक्ट में केवल अपने वार्ड के स्कूल में ही एडमिशन लेने की कोई बाध्यता नहीं है। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है।