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बच्चों के इंटरसेक्स ऑपरेशन पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को राजी, CJI चंद्रचूड़ ने केंद्र को जारी किया नोटिस

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जन्म के समय शिशुओं के इंटरसेक्स सर्जरी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है। इस तरह के ऑपरेशन पर रोक लगाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के तैयार हो गया है। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों की इंटरसेक्स सर्जरी उनके लिए न सिर्फ पीड़ादायक बल्कि सुनहरे भविष्य के लिए भी काफी खतरनाक है। 

सबसे पहले जानकारी के लिए बता दें कि जिन लोगों में पुरूष और महिला दोनों के जननांग होते हैं उन्हें इंटरसेक्स कहा जाता है। देश में इंटरसेक्स सर्जरी के कई मामले सामने आ रहे हैं। मां-बाप अपने बच्चों को पुरुष या महिला बनाने के लिए इस तरह की सर्जरी करवा रहे हैं। 

इस तरह के ऑपरेशनों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां इस तरह की सर्जरी पर रोक लगी है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों को पुरुष या महिला बनाने के लिए उनकी सहमति के बिना जन्म के समय इंटरसेक्स सर्जरी की जा रही है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस तरह के चिकित्सीय हस्तक्षेप दंडनीय अपराध हैं और इन्हें रोकने के लिए एक कानून होना चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट जन्म के समय इंटरसेक्स सर्जरी के मुद्दे पर न्यायिक हस्तक्षेप की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने केंद्र को नोटिस जारी किया और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कार्यवाही में सहायता मांगी।

2019 में मद्रास हाई कोर्ट ने लगाई रोक
2019 में, मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद तमिलनाडु सरकार ने उन शिशुओं पर सेक्स असाइनमेंट सर्जरी पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिनका लिंग जन्म के समय स्पष्ट नहीं होता। हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि जीवन-घातक स्थितियों को छोड़कर ऐसी सर्जरी पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

इंटरसेक्स सर्जरी के साइड इफेक्ट
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 1.7 प्रतिशत बच्चे ऐसी यौन विशेषताओं के साथ पैदा होते हैं जो पुरुष और महिला की कैटेगरी में नहीं आते। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इंटरसेक्स बच्चों के लिंग और रूप-रंग को "ठीक" करने के लिए बार-बार की जाने वाली सर्जरी हैं। इसके बहुत साइड-इफेक्ट हैं, जिसमें स्थायी बांझपन, आजीवन दर्द, यौन संवेदना न होना और मानसिक पीड़ा तक शामिल है।