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J&K: आतंकियों से लड़ने को ग्राम रक्षा समतियों को फिर मजबूत करेगी सरकार, युवाओं को दी जाएगी AK-47?

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J&K: आतंकियों से लड़ने को ग्राम रक्षा समतियों को फिर मजबूत करेगी सरकार, युवाओं को दी जाएगी AK-47?

राजौरी में आतंकी हमलों में 6 लोगों की मौत के बाद सरकार ने एक बार फिर ग्राम रक्षा समतियों को मजबूत करने की योजना बना ली है। यहां लोग पुलिस के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवाने लगे हैं।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकियों द्वारा चार लोगों की हत्या के बाद एक बार फिर से ग्राम रक्षा समितियों को सक्रिय करने की मांग उठ रही है। जानकारी के मुताबिक प्रशासन ने ग्राम रक्षा समितियों को सक्रिय करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। जिले में ग्राम रक्षा समिति के कम से कम 5000 शस्त्रधारी सदस्य हैं। इसके अलावा भी बहुत सारे लोग हथियार लेने के लिए पुलिस के पास रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। दो दशक में पहली बार हो रहा है जबकि ग्राम रक्षा समूह यानी वीडीजी फिर से तैनात होने की ओर है। इसके हर एक सदस्य को .303 राइफल और 100 कारतूस दी जाती हैं। इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि सरकार उन्हें एके-47 देने की भी योजना बना रही है। 


क्या है ग्राम रक्षा समितियों का इतिहास
जम्मू-कश्मीर में जब आतंकियों की वजह से कानून व्यवस्था बहुत बिगड़ गई थी तब 1990 में ग्राम रक्षा समिति बनाई गई थी। कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन की काफी आलोचना की जा रही थी। तब लोगों को सशक्त करने के लिए समितियां बनाई गई थीं। हालांकि बाद में जब फिर से प्रशासन ने नियंत्रण स्थापित किया तो इन समितियों को भंग कर दिया गया। हालांकि फिर से हिंदुओं और कश्मीरी पंडितों को टारगेट करने के मामले सामने आ रहे हैं। 

राजौरी के पंचायत सेंटर में पुलिस ने हथियारों की जांच की और प्रशिक्षण दिलवाने की भी बात कही है। अब यहां रहने वाले युवा अपने पिता या फिर दूसरे रिश्तेदारों को दिए गए हथियार ले रहे हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक राजौरी के एक शख्स ने कहा, मैं अपनी राइफल चेक करवाने आया हूं ताकि आतंकियों का सामना किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस के रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज नहीं है लेकिन उनके चाचा को .303 राइफल दी गई थी। 

एक दूसरे शख्स ने कहा, मेरे चाचा को राइफल दी गई थी लेकिन अब मैं भी अपना नाम दर्ज करवाना चाहता हूं ताकि आतंकियों से लड़ सकूं। इसके अलावा यहां रहने वाले बहुत सारे बुजुर्ग भी इस लड़ाई में शामिल होना चाहते हैं। एक 66 साल के शख्स ने कहा, मैं वीडीसी का सदस्य बने रहना चाहता हूं। मेरा घर जंगल के पास हैं और हम वहां अकेले ही रहते हैं। अगर कोई आतंकी वहां आता है तो मैं उसका सामना कर सकता हूं। 

बता दें कि 1990 में सबसे पले डोडा जिले में वीडीसी बनाई गई थी। इशके बाद राजौरी में भी वीडीसी बनाए गए। वीडीसी के कम से कम 28 हजार सदस्य हैं जिनमें ज्यादातर हिंदू हैं। इसके अलावा सिख और मुस्लिम समुदाय के भी लोग इसमें शामिल हैं। डिस्ट्रिक्ट पुलिस चीफ मोहम्मद असलम के मुताबिक, हम वीडीसी सदस्यों को नए हथियार मुहैया करवा रहे हैं। इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बता दें कि सरकार ने वीडीसी सदस्यों को हर महीने 4000 रुपये का भत्ता देने की भी बात कही थी। हालांकि कई इलाकों में वीडीसी सदस्यों को हथियार देना चिंता का विषय भी बना हुआ है। हथियारों के गलत इस्तेमाल का डर भी बना रहता है।