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हरियाणा में रह्स्यमी बीमारी से खड़े-खड़े पशुओं की अचानक हो रही मौत, 50 से ज्यादा जगह पर हुई पशुओं की मौत, जाने क्या है वजह

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हरियाणा में रह्स्यमी बीमारी से खड़े-खड़े पशुओं की अचानक हो रही मौत, 50 से ज्यादा जगह पर हुई पशुओं की मौत, जाने क्या है वजह 
हरियाणा में सिरसा जिले के बरासरी, रायपुर व रूपावास गांवों में पिछले कुछ दिनों से लगातार पशुओं की अकाल मौत हो रही है। इन गांवों में 24 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक तौर पर काफी नुकसान हुआ है। वहीं पशुपालन विभाग पशुओं की मौत का कारण अधिक ठंड बता रहा है। गांव रूपावास के महावीर सिंह व मोहनलाल के तीन पशु, रामचंद्र ढिल्लो के दो पशु, रायपुर के रामनिवास के तीन पशु, राजवीर सिंह के पांच पशु, बरासरी के सुरेंद्र रोज के चार पशु व अन्य पशुपालकों के पशु अभी भी बीमारी से जुझ रहे हैं।

पशुपालकों ने बताया कि पशुओं के मुंह में छाले होते हैं। इसके बाद खड़ा पशु ही गिरकर मौत हो रही है। उन्होंने बताया कि पशुओं की मौत होने से आर्थिक तौर पर काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। जगदीश रूपावास ने पुशपालकों की चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पशुओं की मौत होने से पशुपालक चिंता में हैं। जबकि पशुपाालन विभाग समय रहते हुए कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

ग्रामीाणों ने कहा- एेसी बीमारी पहली बार देखी
भगाना गांव में मुंह खुर की बीमारी भी फैली हुई है। गांव के लोगों ने कहा है कि ये बीमारी तो फैली हुई है मगर कंपन वाली ये बीमारी जिसमें पशुओं की मौत हो रही है। पहली बार देखी जा रही है। पशु अचानक मर रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ये बीमारी गल घोटू है। इस बीमारी में ही पशुओं की अचानक मौत होती है।

उधर,पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. बीएस बांसल से जब पूछा गया तो  उन्होंने बताया कि मुझे बरासरी, रायपुर व रूपावास में पशुओं की मौत होने के बारे में जानकारी मिली है। पशु चिकित्सकों को इन गांवों में भेजा गया है। पशुओं की मौत का कारण अधिक ठंड होना है। इससे पशुओं के निमोनिया हो रहा है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पशुपालक विशेष ध्यान दें। पशुओं को गर्म पानी पिलाए,वहीं पशुओं को समय समय पर गुड़ खिलाएं। 


गांव भगाना में पशुओं में गंभीर बीमारी फैली हुई है। 20 दिनों में गांव में 100 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं। उच्च अधिकारियों को मामले की सूचना तक नहीं है। ग्रामीण लगातार डॉक्टरों व मौके पर टीम बुलाने की रिक्वेस्ट कर चुके हैं मगर स्टाफ हरकत में नहीं आ रहा। हर रोज चार से पांच पशुओं की मौत हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि छोटे पशुओं पर इसका अधिक असर है।

मामले की सूचना के बाद डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन ने मौके के स्टाफ से हालात जाने हैं। अधिकारियों को सूचना न देने वाले व मामला दबाने वाले स्टाफ व डाक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। प्रथम दृष्टया इस रोग को डॉक्टर गल घोटू मिक्स इन्फेक्शन बता रहे हैं। हालांकि ब्लड सैंपल रिपोर्ट के बाद ही असल बीमारी पकड़ में आएगी। पशुपालन विभाग की टीम सोमवार को भगाना गांव में जाएगी।

जानिए... गल घोटू बीमारी क्या है, लक्षण और बचाव के तरीके
गल घोटू जीवाणु रोग है जिससे ग्रसित पशु की मृत्यु होने की अंदेशा अधिक होती है। यह रोग “पास्चुरेला मल्टोसीडा” नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है। सामान्य रूप से यह जीवाणु श्वास तंत्र के ऊपरी भाग में मौजूद होता है एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के दबाव में जैसे की मौसम परिवर्तन, वर्षा ऋतु, सर्द ऋतु , कुपोषण, लंबी यात्रा, मुंह खुर रोग की महामारी एवं कार्य की अधिकता से पशु को संक्रमण में जकड़ लेता है।

संक्रमण : संक्रमित पशु से स्वस्थ पशु में दूषित चारे, लार द्वारा या श्वास द्वारा स्वस्थ पशु में फैलता है। ये बीमारी गाय की तुलना में ये भैंस को अधिक होती है। प्रभावित पशुओं में इसकी मृत्यु दर 50 से 100% तक पहुंच जाती है।

लक्षण एकदम तेज बुखार (107⁰ F तक) होना एवं पशु की एक घंटे से लेकर 24 घंटे के अंदर मृत्यु होना या पशु किसान को बिना लक्ष्ण दिखाए मृत मिलना।

प्रचुर लार बहना ।

नाक से स्राव बहना एवं सांस लेने में तकलीफ होना।

आंखें लाल होना।

चारा चरना बंद करना एवं उदास होना।

गले,गर्दन एवं छाती पर दर्द के साथ साजिश आना

मुंह खुर व मिक्सड इन्फेक्शन की संभावना: एक्सपर्ट
एक्सपर्ट मिक्स्ड इन्फेक्शन लग रहा है। एफएमडी मुंह खुर की बीमारी है। एशिया वन टू एओ ये चार टाइप को प्रोटेक्ट करती है। कई सालों से ये ही वैक्सीन चल रही है। ये वायरस नेचर के आधार पर मुटेशन मतलब खुद को चेंज कर लेता है। मुटेशन के दौरान इनकी प्रोटेक्शन नहीं हो पाती और दूसरा इन्फेक्शन आ जाता है। जिसका पशु की बॉडी में अधिक असर करता है।

ग्रामीण बोले-शरीर में कंपन होती है और पशु गिर जाता है
सरपंच शक्ति सिंह ने बताया कि पशुओं में लक्षण इस तरह के हैं कि कुछ समझ नहीं आ रहा। अचानक कंपन सी होती है और मुंह से लार गिराते हैं। कुछ समय बाद गिर जाते हैं और मौत हो जाती है। डॉक्टरों को जब तक बुलाए तो पशु मर चुका होता है। इसके अलावा और पशुओं को ऐसा रोग न हो डाॅक्टर को कहते हैं तो केवल आश्वासन मिलता है। किसानों का कहना है कि भगाना के पशुपालकों को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है।

हमारी टीम सोमवार को गांव में जाएगी। ब्लड सैंपल लेकर यूनिवर्सिटी से जांच करवाकर बीमारी की पहचान की जाएगी। गांव को अलग अलग जोन में बांटकर टीम बनाकर वैक्सीनेशन की जाएगी और बीमारी को कंट्रोल करने को लेकर प्लानिंग की जाएगी। हमारे स्टाफ से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि उन्होंने अभी तक हमें सूचना क्यों नहीं दी- डीएस सिंधू, डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन एवं डेयरी विभाग।