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Haryana: फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर लड़ा था चुनाव, अब जाँच के बाद गढ़ी कलां के सरपंच को पद से हटाया

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Haryana: फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर लड़ा था चुनाव, अब जाँच के बाद गढ़ी कलां के सरपंच को पद से हटाया
हरियाणा के सोनीपत के गन्नौर में गलत जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के मामले में उपायुक्त ने कार्रवाई करते हुए गांव गढ़ी कलां के सरपंच राकेश कुमार को पद से हटा दिया है।

उपायुक्त ललित सिवाच ने खंड विकास एवं पंचायत विभाग को राकेश कुमार से ग्राम पंचायत का रिकार्ड लेकर गांव के बहुमत रखने वाले पंच को सौंपने के आदेश दिए हैं। उपायुक्त ने सरपंच पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 175 के अनुसार अयोग्य साबित हुए सरपंच को पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 51(1)(ख) व 51(3)(ख) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए पद से हटाया है।


 
यह था मामला
गढ़ी कला गांव के दीपक ने गांव के सरपंच राकेश कुमार पर फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र तैयार करवाकर चुनाव लड़ने का आरोप लगाने की शिकायत दी गई थी। दीपक ने बताया था कि राकेश कुमार ने खुद की ओढ़ जाति दिखाकर गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया, जबकि वह हिंदू राजपूत हैं। इस झूठे प्रमाणपत्र के सहारे उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित गांव के सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया और चुनाव जीत कर गांव के सरपंच बन गए। शिकायतकर्ता ने राकेश कुमार के हिंदू राजपूत होने के प्रमाण भी संलग्न कर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसके निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की थी।
 

अतिरिक्त उपायुक्त की जांच रिपोर्ट में सरपंच पर आरोप सिद्ध
मामले में उपायुक्त की तरफ से जिला स्तरीय जांच के लिए अतिरिक्त उपायुक्त सोनीपत को इस पूरे मामले की जांच सौंपी थी। अतिरिक्त उपायुक्त की ओर से की गई जांच में शिकायतकर्ता के सरपंच पर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए थे। जिसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट को उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को आगामी कार्रवाई के लिए सौंप दिया था।

 

इसके बाद उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को 19 जनवरी को अपना पक्ष रखने के आदेश दिए थे। जिसमें सरपंच राकेश कुमार खुद के अनुसूचित जाति होने के साक्ष्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। सरपंच ने उपायुक्त से साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय मांगा, लेकिन 15 दिन बाद भी वह कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। जिसके चलते उपायुक्त ने अब सरपंच को पद मुक्त कर दिया है।