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हरियाणा मे बिजली बिल के साथ वसूला जा रहा पंचायत और म्युनिसिपल टैक्स, झेलनी पड़ रही लोगों को दोहरी मार

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हरियाणा मे बिजली बिल के साथ वसूला जा रहा पंचायत और म्युनिसिपल टैक्स, झेलनी पड़ रही लोगों को दोहरी मार

इस महीने जो बिजली बिल आया है उसे देखकर लोगों में हड़कंप मच गया है. अबकी बार सामान्य बिल की अपेक्षा कई गुना अधिक बिल आया है. लोगों ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि सरकार ढाई रुपये यूनिट Charge करने की वजह साढे चार रुपए Unit चार्ज कर रही है. इसके साथ ही 2 महीने की वजह चार- चार महीनों का बिल आ रहा है जिससे कि बिल की राशि 5000 रूपये से लेकर 50000 रूपये तक की आ रही है.

वसूला जा रहा है पंचायत टैक्स

लोगों का कहना है कि पंचायत की तरफ से उन्हें कोई भी वस्तु प्रयोग करने के लिए नहीं मिली है. साथ ही उनका कहना है कि बिजली के बिल के नाम से उनसे पंचायत Tax वसूला जा रहा है. जिससे उनकी Pocket पर काफी अधिक असर पड़ रहा है. बुधवार के दिन उपभोक्ताओं ने बिजली निगम कार्यालय में पहुंचकर अपनी सारी Trouble को बयान किया है. बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र के बिजली बिलों में पंचायत टैक्स को और शहरी क्षेत्र में म्यूनिसिपल टैक्स को जोड़कर भेजा गया है.


असुविधा का करना पड़ रहा है सामना

बिजली निगम की तरफ से पूरे System में बदलाव किया गया है. जिसके कारण लोगों को बहुत- सी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को 2 महीने का बिजली बिल देने की वजह 4 महीनों का बिल दिया जा रहा है. सारा काम हो Online होने से अब बिल प्रक्रिया में भी बदलाव हो गया है.

झेलनी पड़ रही लोगों को दोहरी मार

गांव खानपुर निवासी मनीराम का कहना है कि गांव व देहात में लंबे समय से पंचायतों का कार्यकाल बंद पड़ा हुआ है. इसके बाद भी लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तो बिजली का बिल ही इतना अधिक आया है और दूसरा Excessive फंड लगाकर उन्हें कई गुना अधिक बढ़ाया जा रहा है. ऐसे में सब लोगों की मुश्किलें बढ़ी हुई है.


लिया जा रहा नियम निर्धारित बिल

बिजली निगम के SE कशिक मान जी ने कहा है कि निगम के सिस्टम में बदलाव किया गया है. जिस कारण से उपभोक्ताओं को थोड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि किसी भी उपभोक्ता से ज्यादा बिल नहीं वसूला जा रहा है. जो नियम के आधार पर निर्धारित किए गए हैं उसी आधार पर बिल दिया जा रहा है. वे कहते हैं कि पंचायती टैक्स लेना सरकार का कार्य है, यह काम हमारा नहीं है. रही टैक्स की बात तो ये चार्ज पहले भी लिया जाता था.