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आदमपुर के रण में कूदा किसान संगठन, कुलदीप बिश्नोई के लिए टेंशन बनेंगे चढ़ूनी; उपचुनाव में किसका समर्थन और विरोध पर मांगी राय

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आदमपुर के रण में कूदा किसान संगठन, कुलदीप बिश्नोई के लिए टेंशन बनेंगे चढ़ूनी; उपचुनाव में किसका समर्थन और  विरोध पर मांगी राय
हरियाणा के हिसार जिले की आदमपुर विधानसभा उपचुनाव के रण में एक बार फिर से किसान संगठन कूदने की तैयारी में हैं। भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप ने किसानों से इस पर राय लेनी शुरू कर दी है। यदि किसान संगठनों ने भाजपा उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई का विरोध करना शुरू कर दिया तो यह प्रदेश में दूसरा उप चुनाव होगा, जिसमें किसान संगठन भाजपा उम्मीदवार की खिलाफत करेंगे।

हालांकि किसान आंदोलन के समय कुलदीप कांग्रेस से विधायक थे। वहीं पंजाब विधानसभा चुनाव में भी किसान संगठनों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, परंतु उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हुई थीं। अब आदमपुर उपचुनाव के लिए भारतीय किसान यूनियन नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों से राय मांगी है कि आदमपुर विधानसभा उप चुनाव में भाजपा को हराने के लिए किसानों की तरफ से कोई उम्मीदवार खड़ा किया जाए या किसी का समर्थन किया जाए या केवल भाजपा का विरोध किया जाए या कुछ भी न किया जाए। किसानों की राय के बाद ही चढूनी ग्रुप अपना फैसला लेगा।

किसान आंदोलन के समर्थन में अभय ने दिया था इस्तीफा

कृषि कानून के विरोध में अभय चौटाला ने 27 जनवरी 2021 को विधायकी से इस्तीफा दिया था। वे ऐसा करने वाले देश के एकमात्र विधायक थे। इसके बाद चुनाव प्रचार में किसानों ने भाजपा उम्मीदवार गोविंद कांडा का विरोध किया। हालांकि भारतीय किसान यूनियन टिकैत के नेता राकेश टिकैत ने ऐलनाबाद में किसानों के मंच से कहा था कि जो आदमी तुम्हारे पास अपनी गठरी छोड़कर गया था, अब उसे सवाया करके लौटा दो।

राकेश टिकैत का इशारा अभय चौटाला को वोट देने की तरफ था, जबकि गुरनाम सिंह चढूनी ने ऐलनाबाद उप चुनाव में किसानों से अपील की थी कि वे भाजपा उम्मीदवार की बजाय किसी भी उम्मीदवार को वोट दे दें। 30 अक्टूबर को मतदान हुआ और 2 नवंबर को मतगणना हुई। इसमें अभय चौटाला ने गोविंद कांडा को 6708 वोट से हराया था और एक बार फिर हलके की कमान उनके हाथ में आ गई।

पंजाब विधानसभा चुनाव में नहीं जीता कोई किसान नेता

किसान आंदोलन के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में किसान संगठनों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने संयुक्त संघर्ष पार्टी का गठन किया था और खुद चुनाव न लड़कर अपने समर्थकों को चुनाव लड़वाया। पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की संयुक्त समाज मोर्चा से गठबंधन करके पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, परंतु कोई भी उम्मीदवार जीत नहीं सका। राजेवाल भी हार गए।