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Chautala Family: हरियाणा की राजनीति में आने वाला है भूचाल, जल्द एक हो सकता है चौटाला परिवार, दिए पांच संकेत

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Chautala Family: हरियाणा की राजनीति में आने वाला है भूचाल, जल्द एक हो सकता है चौटाला परिवार, दिए पांच संकेत
चंडीगढ़। दुश्मनी लाख सही, खत्म ना कीजे रिश्ता... दिल मिले ना मिले, हाथ मिलाते रहिये..! प्रख्यात शायर निदा फाजली की यह पंक्तियां ताऊ देवीलाल के परिवार के उन सदस्यों पर सटीक बैठ रही हैं, जो लंबी रार और तकरार के बाद एक तो होना चाहते हैं, लेकिन अपनी तरफ से इसकी पहल करने को कोई तैयार नहीं है। 


हरियाणा की राजनीति के आज जिस तरह के हालात हैं, उसके मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के परिवार के राजनीतिक तौर पर एक होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। आज जहां ओमप्रकाश चौटाला व अभय सिंह चौटाला के नेतृत्व वाले इनेलो को जजपा की जरूरत है, वहीं अजय सिंह चौटाला व दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जजपा का काम इनेलो के बिना चलता दिखाई नहीं दे रहा है। 

चौटाला परिवार की इस राजनीतिक एकजुटता से भी आगे, बड़ी बात यह है कि भाजपा को जजपा व इनेलो की एकजुटता की अधिक जरूरत है। भाजपा चाहती है कि चौटाला परिवार राजनीतिक रूप से एक हो जाए, ताकि इनेलो व जजपा के मतों में बिखराव का फायदा कांग्रेस को न मिल पाए। 


हर दल का अपना एक बंधा हुआ वोट बैंक होता है। जितने वोट कांग्रेस और इनेलो-जजपा में बंटेंगे, भाजपा को उतना ही अधिक फायदा मिलने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। चूंकि राजनीति में कुछ भी संभव है, इसलिए 2024 के चुनाव के दौरान इनेलो व जजपा की संभावित एकजुटता कहीं न कहीं समर्थन के रूप में भाजपा के काम आ सकती है, इसलिए भाजपा का एक बड़ा तबका चौटाला परिवार में राजनीतिक एकजुटता कराने के प्रयासों में जुटता दिखाई दे रहा है। 


ऐसा भी नहीं है कि चौटाला परिवार में संभावित राजनीतिक एकजुटता का फायदा सिर्फ भाजपा को ही मिलेगा। जजपा व इनेलो दोनों ही इस एकजुटता के बाद फायदे में नजर आ सकते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि चौटाला का काडर वोट इनेलो के साथ है, लेकिन जजपा चूंकि भाजपा के साथ सत्ता में है, इसलिए काफी हद तक कार्यकर्ता अपने काम कराने के लिए उसके खेमे में खड़े दिखाई देते हैं। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इनेलो व जजपा दोनों 2024 का चुनाव अलग-अलग लड़े तो मुकाबला भाजपा व कांग्रेस का रह जाएगा, लेकिन जजपा व इनेलो यदि राजनीतिक रूप से एकजुट हो गए तो स्वाभाविक रूप से मुकाबला तिकोना होगा और वह वोट बैंक पूरी तरह से बंट जाएगा, जिस पर इनेलो और जजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी अपना दावा करती है। 


भाजपा की रणनीति भी यही कह रही है कि जजपा व इनेलो को मिलाकर उन्हें अपने साथ जोड़ा जाए, ताकि राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने की संभावनाएं बलवती की जा सकें। यदि इनेलो व जजपा के बीच एकजुटता नहीं होती तो भाजपा अपनी मौजूदा साथी जजपा को उसकी मांग के अनुरूप लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव में सीटों का आवंटन करेगी, इसकी बिल्कुल भी संभावना नहीं है। 

इसके अलावा, इनेलो व जजपा के अलग-अलग चुनाव लड़ने का पूरा फायदा कांग्रेस को मिलेगा, इसमें भी कोई शक नहीं है, इसलिए कांग्रेस की कोशिश चौटाला परिवार में बिखराव बनाए रखने की है। इस तरह, प्रदेश में राजनीति के नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। 

इन कारणों से बन रही चौटाला परिवार के एक होने की संभावना 

जननायक जनता पार्टी के प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला ने बयान दिया है कि उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के आज तक के सबसे बढ़िया सीएम और शासक रहे हैं। उनके सीएम पद से हटने के बाद अधिकारी बेलगाम हो गए। मैं ओमप्रकाश चौटाला को पब्लिक का नेता मानता हूं। वह हमारे प्रेरणास्रोत और आदर्श हैं। 

इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला का कहना है कि ताऊ देवीलाल के जन्मदिन पर 25 सितंबर को फतेहाबाद में तीसरे मोर्चे के संभावित सभी नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे। हालात बने तो हम केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह सरीखे नेताओं से भी दोस्ती करने से परहेज नहीं करेंगे। जेजेपी यदि सार्वजनिक तौर पर माफी मांगकर अपने पापों का प्रायश्चित करे तो हम उसके साथ गठबंधन करने पर विचार कर सकते हैं। 

इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने कहा है कि यदि समान विचारधारा वाले दल एकजुट होते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। 

बाढ़डा से जजपा की विधायक नैना चौटाला का कहना है कि राजनीति में कब क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता। सब कुछ संभव है। 

चौटाला परिवार के कुछ सदस्यों का कहना है कि यदि जेजेपी अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला एकजुटता के गंभीर प्रयास करेंगे तो ही बात बनेगी अन्यथा पहले आप-पहले आप में मामला लटकता रहेगा।