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बैंकिंग संकट में सबसे ज्यादा चमका सोना, शेयर निवेशकों को 8 लाख करोड़ का झटका, डॉलर के मुकाबले कांपता रहा रुपया

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बैंकिंग संकट में सबसे ज्यादा चमका सोना, शेयर निवेशकों को 8 लाख करोड़ का झटका, डॉलर के मुकाबले कांपता रहा रुपया

वित्त वर्ष 2022-23 में सोने ने करीब 18 फीसद, चांदी ने 9.5 फीसद रिटर्न दिया। इसकी तुलना में निफ्टी और सेंसेक्स तकरीबन फ्लैट रहे। रुपये ने डॉलर के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया। वहीं, शेयर बाजार के निवेशकों को इस अवधि में करीब आठ लाख करोड़ का झटका लगा है।

अमेरिका और यूरोप में बैंक संकट और आर्थिक मंदी के डर के कारण, सोने की कीमतों ने चालू वर्ष 2023 की पहली तिमाही में सभी संपत्तियों के बीच शानदार रिटर्न दिया। वित्त वर्ष 2023 में सोने ने करीब 18 फीसद, चांदी ने 9.5 फीसद रिटर्न दिया है। बीती तिमाही सोने के लिए बेहतर साबित हुई। एमसीएक्स पर सोने की कीमतें लगभग ₹54,975 प्रति 10 ग्राम से बढ़कर इस वित्तवर्ष में जनवरी से मार्च के दौरान ₹59,371 प्रति 10 ग्राम स्तर पर पहुंच गईं। सोने ने मार्च 2023 तिमाही में 8 फीसद की वृद्धि दर्ज की।

सेंसेक्‍स और निफ्टी का रिटर्न फ्लैट रहा
पूरे साल में सेंसेक्‍स और निफ्टी का रिटर्न फ्लैट रहा। इस दौरान सेंसेक्‍स में आधा फीसद बढ़त रही तो निफ्टी में आधे फीसद की गिरावट दर्ज हुई। मिडकैप इंडेक्‍स भी आधा फीसद कमजोर हुआ तो स्‍मालकैप इंडेक्‍स पूरे साल में 4.5 फीसद कमजोर हुआ। लगभग सारे शेयर बाजार में गिरावट रही और बीएसई 500 करीब 2.5 फीसद कमजोर हुआ। बाजार के उतार चढ़ाव में सेंसेक्स की कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई। 

31 मार्च 2022 को बीएसई पर लिस्ट कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2,64,06,501.38 करोड़ रुपये था, जबकि 31 मार्च 2023 को बाजार बंद होने पर यह 2,58,13,770.21 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह निवेशकों को इस अवधि में करीब आठ लाख करोड़ का झटका लगा है।

रुपये में 7.8 फीसद की गिरावट दर्ज
अधिकांश प्रमुख मुद्राओं में वित्तीय वर्ष 2022-23 में रूस-यूक्रेन युद्ध, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में तेज वृद्धि के कारण उच्च अस्थिरता देखी गई। बीते वित्तीय वर्ष में रुपया भी अछूता नहीं रहा और 7.8 फीसद की गिरावट आई। यह गिरावट वित्तवर्ष 2019-20 के बाद सबसे अधिक है। रुपया वित्त वर्ष 23 में एक साल पहले 75.79 के मुकाबले 82.18 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ। 2013-14 के मुद्रा संकट के बाद यह दूसरी बार था, जब घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले करीब 8 फीसद कमजोर हुई थी।